ब्रेकिंग

‘चंदा चोरी’ की तर्ज पर अब ‘फाइल चोरी’ का खेल? पुलिस हाउसिंग में जांच रिपोर्ट दबाने के गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह व वित्त विभाग को भेजे गए प्रतिवेदन में उठे सवाल; घटिया निर्माण, गिरी कॉलोनियां और वर्षों से लंबित जांचों पर कार्रवाई नहीं होने का दावा

भोपाल 10 जुलाई 2026। मप्र पुलिस हाउसिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। एक अधिवक्ता ने आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव गृह और अपर मुख्य सचिव वित्त को विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर आरोप लगाया है कि निगम में घटिया निर्माण से जुड़े मामलों की जांच रिपोर्टें वर्षों तक दबाकर रखी जाती हैं या रहस्यमय तरीके से गायब हो जाती हैं, जिससे दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती।

प्रतिवेदन के अनुसार इससे पहले 2 जुलाई 2026 को भी लोकायुक्त और पुलिस हाउसिंग के प्रबंध संचालक को दस्तावेजों सहित शिकायत सौंपी जा चुकी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वास्तविक चिंता केवल भवनों के गिरने या ध्वस्त होने की नहीं, बल्कि उन मामलों की जांच पूरी होने के बाद भी संबंधित फाइलों पर वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं होने की है।

बरघाट और खरगोन के मामलों का हवाला

प्रतिवेदन में सिवनी जिले के बरघाट में निर्मित आठ पुलिस आवासों के घटिया निर्माण के कारण धराशायी होने का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इंजीनियरिंग कॉलेज और जांच अधिकारियों द्वारा संयुक्त जांच रिपोर्ट निगम मुख्यालय को भेजे जाने के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीतने पर भी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई।

खरगोन के आवासइसी प्रकार खरगोन की डीआरपी लाइन में निर्मित 26 पुलिस आवासों को पुलिस अधीक्षक द्वारा खतरनाक घोषित कर खाली कराने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जांच रिपोर्ट मुख्यालय पहुंचने के बाद भी दोषी तकनीकी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई। जिसका विस्तार से खुलासा आगामी एपिसोड में किया जाएगा।

प्रभारी अधीक्षण यंत्री पर गंभीर सवाल

प्रतिवेदन में तत्कालीन सहायक यंत्री और वर्तमान प्रभारी अधीक्षण यंत्री आलोक निगम का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि जिन मामलों में उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना थी, उन्हीं जांच प्रतिवेदनों को दबाने या लंबित रखने से उन्हें सबसे अधिक लाभ मिला। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

‘फाइल चोरी’ का बड़ा खेल?

शिकायत में कहा गया है कि जिस तरह मंदिरों में चंदा चोरी के मामलों ने जनमानस को झकझोरा, उसी तरह सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि जांच प्रतिवेदन ही गायब या निष्क्रिय कर दिए जाएं तो यह कहीं अधिक गंभीर मामला है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस हाउसिंग में ऐसी कई जांच रिपोर्टें वर्षों से कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं।

लोकायुक्त जांच के बावजूद पदोन्नति पर सवाल

प्रतिवेदन में यह भी सवाल उठाया गया है कि लोकायुक्त में

खरगोन की डीआरपी लाइन

शिकायत दर्ज होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों के समयमान वेतनमान, पदोन्नति और सेवा-वृद्धि जैसे प्रस्ताव कैसे तैयार हो जाते हैं और प्रबंधन उन्हें आगे बढ़ाने के लिए तैयार कैसे हो जाता है। सूत्रों की माने तो एमडी के पदस्थ होने के बावजूद कॉर्पोरेशन में ऐसे कई खेल उनसे छिपा कर खेलने की संभावना जताई जा रही है।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर यह पता लगाने की मांग की है कि पुलिस हाउसिंग में आखिर कितनी जांच रिपोर्टें वर्षों से लंबित हैं, किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है और दोषियों के विरुद्ध अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

यद्यपि यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और शासन को भेजे गए प्रतिवेदन पर आधारित है, यदि संबंधित अधिकारियों अथवा पुलिस हाउसिंग निगम का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।