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हीमोफीलिया मरीजों को दिया जा रहा रिलायंस कंपनी का हानिकारक प्लाज्मा इंजेक्शन

WHO व अदालत की मनाही के बावजूद ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश में जारी..

ग्वालियर, 13 अक्टूबर 2025। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और देश के उच्च न्यायालयों द्वारा स्पष्ट मनाही और चेतावनी के बावजूद मध्यप्रदेश में हीमोफीलिया के मरीजों को रिकॉम्बीनेंट फैक्टर VIII की जगह रिलायंस कंपनी का प्लाज्मा-डेराइव्ड फैक्टर 8 इंजेक्शन (जैसे HemoRel-A) लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के प्लाज्मा इंजेक्शन से मरीजों में एचआईवी, हेपेटाइटिस और अन्य संक्रमित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

हीमोफीलिया- जीवनभर रहने वाली दुर्लभ बीमारी है, यह एक आनुवांशिक रक्त संबंधी विकार है। जिसमें मरीज के शरीर में रक्त जमाने वाले तत्व यानी क्लॉटिंग फैक्टर VIII या IX की कमी होती है। ऐसी स्थिति में मामूली चोट भी गंभीर और कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है। भारत में हीमोफीलिया ए और बी के अनुमानतः 1.36 लाख मरीज हीमोफीलिया से पीड़ित हैं परंतु केवल 21 हजार ही पंजीकृत हैं। मध्यप्रदेश में करीब 1048 और ग्वालियर में 40 मरीज दर्ज हैं।

अस्पतालों में अव्यवस्था, मरीज बेहाल

मरीजों की इतनी अधिक संख्या होने के बाद बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्वालियर के मुरार अस्पताल में कोई खास इंतजाम नहीं किए गए। मरीज का कहना है कि यहां हीमोफीलिया मरीजों के लिए डे केयर यूनिट तो बनाई गई है मगर उसमें या तो अस्पताल के कर्मचारी मौज मस्ती करते हैं अथवा अन्य पेशंटों का कब्जा बना रहता है। दूरदराज सेहीमोफीलिया में मरीजों के लिए हानिकारक इंजेक्शन कराहते एवं आहें भरते हुए आए मरीजों को कभी बिस्तर के लिए तो कभी इंजेक्शन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ जाता है, कभी-कभी तो बिना इंजेक्शन लगवाए वापस जाना पड़ता है। बाजार में इंजेक्शन की उपलब्धता न होने अथवा महंगे होने की वजह से मरीजों को यहां रिलायंस कंपनी का प्लाज्मा डिराइव्ड फैक्टर 8 इंजेक्शन ही लगवाना पड़ता है भले ही कितना भी हानिकारक क्यों ना हो।

विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित मुंबई एवं दिल्ली उच्च न्यायालयों में हीमोफीलिया बीमारी की गंभीरता के अनुरूप उसके इलाज पर जोर देते हुए चिंता व्यक्त की गई। जिसके अंतर्गत 11 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने लोकनायक अस्पताल को फटकार लगाते हुए हीमोफीलिया मरीजों के लिए केवल रिकॉम्बीनेंट फैक्टर इंजेक्शन की उपलब्धता और उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा कि मरीजों को “किफायती और सुरक्षित उपचार” प्रदान करना राज्यों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद आखिरकार क्या मजबूरी है कि मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आज भी प्लाज्मा इंजेक्शन का उपयोग जारी है।

रिलायंस के प्लाज्मा डिराइव्ड F-8 के साइड इफेक्ट..

जहां एक ओर दवा विशेषज्ञों की माने तो इस इंजेक्शन से मरीजों में साइड इफेक्ट के तौर पर एचआईवी, हेपेटाइटिस, पीलिया आदि कई संक्रमित बीमारियों का खतरा देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग एवं इसके अधिकारियों पर रिलायंस कंपनी का इफेक्ट साफतौर पर दिख रहा है। युगक्रांति संपादक ब्रजराज एस तोमर द्वारा मरीजों से मुलाकात एवं ग्वालियर अस्पताल के मौका मुआयने दौरान जब पूरे मामले में स्टोर प्रभारी, हीमोफीलिया प्रभारी, हेमेटोलॉजिस्ट एवं प्रदेश की हिमोफीलिया डायरेक्टर डॉ रूबी खान से विस्तार से चर्चा की तो किसी को रिलायंस कंपनी की वकालत करते हुए तो किसी को स्वयं को बचाते हुए टालम- टोल वाले गोल-मोल वक्तव्य देते हुए सुना गया।

इनका कहना है..

हमारा काम स्टोर का लेखा जोखा एवं व्यवस्था देखना है, इंजेक्शन रिकमंड करना यहां के डॉक्टर का कार्य है एवं रेट कॉन्टैक्ट फाइनल करना भोपाल प्रदेश मुख्यालय की जिम्मेदारी है। फिलहाल हमारे पास 500 यूनिट के प्लाज्मा फैक्टर 8 के इंजेक्शन उपलब्ध है, नोवा कंपनी का रिकंबीनेंट फैक्टर 8 का एक इंजेक्शन एवं Tokeda कंपनी के F-9 के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।   *जितेंद्र सिंह स्टोर प्रभारी मुरार अस्पताल

*हीमोफीलिया प्रभारी डॉ अनिल ने फोन पर टालम टोल करते एवं खुद को बचाते हुए स्टोर प्रभारी से बात करने को कहा।

हर हालत में रिकोंबीनेंट फैक्टर के ही इंजेक्शन मरीजों के लिए रिकमेंड होने चाहिए मगर जिस कंडीशन में छटपटाते एवं दर्द से कराहते हुए जब मरीज आता है तो ऐसे में जो भी इंजेक्शन उपलब्ध होता है वही लगा दिया जाता है। इससे ज्यादा हम कुछ कर नहीं सकते क्योंकि दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करना एनएचएम भोपाल का दायित्व है। वैसे भी मैं किसी शासकीय दायित्व पर नहीं हूं ये तो मैं सामाजिक कार्य के रूप में अपनी निजी सेवा दे रहा हूं।       *डॉ विजय चौधरी हेमेटोलॉजिस्ट 

इधर-उधर की तमाम दलीलों के बाद बोली कि”मैं इस पूरे मामले को गंभीरता दिखवाती हूं सोमवार तक अस्पताल की सभी अव्यवस्था दुरुस्त हो जाएंगी एवं अबिलंब रिकोंबीनेंट फैक्टर 8 के इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।                *डॉ रूबी खान हीमोफीलिया डायरेक्टरेट भोपाल

हीमोफीलिया इंजेक्शन

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चल रही इस स्थिति से न केवल न्यायालय और WHO के निर्देशों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि मरीजों की जान को भी खतरा पैदा हो रहा है। सवाल यह है कि जब सुरक्षित रिकॉम्बीनेंट इंजेक्शन उपलब्ध हैं तो फिर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हानिकारक प्लाज्मा-डेराइव्ड इंजेक्शन के उपयोग पर रोक क्यों नहीं लगा पा रहे? आखिरकार मरीजों के स्वास्थ्य से कब तक खिलवाड़ किया जाएगा?