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भवन विकास निगम में ₹1.51 करोड़ का घोटाला!

एमपीबीडीसी के निर्माण कार्यों में खुली लूट, ऑडिट रिपोर्ट ने की भ्रष्टाचार की पुष्टि

भोपाल 7 जनवरी 2026। लंबे समय से सुर्खियां बटोर रहे भवन विकास निगम एक नए खुलासे के रूप में फिर से सुर्खियों में आया है जिसमें मध्यप्रदेश बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPBDC) के निर्माण कार्यों में व्यवस्थित भ्रष्टाचार और ठेकेदारों को अनुचित लाभ दिए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

यह खुलासा प्रधान महालेखाकार (लेखापरीक्षा-II), मध्यप्रदेश की ताज़ा ऑडिट जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि एमपीबीडीसी ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदारों को ₹1.51 करोड़ की अवैध वित्तीय सहायता पहुंचाई।

ऑडिट रिपोर्ट क्या कहती है?

12 नवंबर 2025 को जारी ऑडिट जांच क्रमांक AENQ-922717 में पाया गया कि_
एमपीबीडीसी द्वारा कराए गए 10 प्रमुख निर्माण प्रोजेक्ट्स में खुदाई से निकली हार्ड रॉक (कठोर चट्टान) की कीमत ठेकेदारों से जानबूझकर वसूली ही नहीं गई।
जबकि अनुबंध की Additional Special Conditions – Clause 13 के अनुसार: “खुदाई से निकली हार्ड रॉक सरकारी संपत्ति होती है, यदि ठेकेदार के पास रखी जाती है तो ₹150 प्रति घनमीटर की दर से वसूली अनिवार्य है”।

ऑडिट में खुलासा हुआ कि कुल 100,493.1175 घनमीटर हार्ड रॉक खुदाई से निकली, जिसकी वसूली योग्य राशि ₹1,50,73,967 (करीब ₹1.51 करोड़) थी लेकिन रनिंग बिल Running Account (RA) Bills से एक रुपया भी नहीं काटा गया।
👉 यानी ठेकेदारों को सीधे-सीधे सरकारी खजाने से फायदा पहुंचाया गया।

इन परियोजनाओं में हुई गड़बड़ी ?

ऑडिट में जिन प्रमुख निर्माण कार्यों का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं:

पाटी- सीएम राइज़ ट्राइबल स्कूल / शास.गवर्नमेंट एक्सीलेंस हाई स्कूल_वसूली योग्य राशि 30 लाख से अधिक

छतरपुर- सीएम राइज़ स्कूल/ सरकारी मॉडल हाई स्कूल_बसूली योग्य राशि ₹25 लाख, ठेकेदार हरगोविंद गुप्ता

तलवाड़ा बुजुर्ग जिला बरवानी में सीएम राइज स्कूल का निर्माण कार्य चल रहा है_₹23 लाख 64 हजार

भोपाल- नया सुल्तानिया 300 बिस्तरों वाला अस्पताल_₹20 लाख से अधिक

घनसौर- सीएम राइज़ ट्राइबल स्कूल/ शास. एक्सीलेंस हाई स्कूल।

दतिया मेडिकल कॉलेज परिसर में क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक का निर्माण।

अंजद- सीएम राइज़ ट्राइबल स्कूल /शास. बॉयज़ हाई स्कूल

डोंडवाड़ा- सीएम राइज़ ट्राइबल स्कूल/ शास. हाई स्कूल

बरवानी जिले के अंजद और राजपुर में सीएम राइज स्कूल भवनों का निर्माण कार्य।

छपारा- सीएम राइज़ ट्राइबल स्कूल/ शास. एक्सीलेंस हाई स्कूल

यानी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के नाम पर खुली लूट।

सबसे गंभीर और बड़ा सवाल_

क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के ₹1.51 करोड़ की वसूली रोकी जा सकती थी? क्या Running Bills पास करने वाले इंजीनियरों और अफसरों पर कार्रवाई होगी?
ठेकेदारों से अब तक रकम क्यों नहीं वसूली गई?
क्या यह सिर्फ 10 प्रोजेक्ट्स की कहानी है या पूरे एमपीबीडीसी में यही खेल चल रहा है?

ऑडिट की सीधी टिप्पणी में ऑडिट अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि “राशि की वसूली न होने से निष्पादन एजेंसी को संभावित वित्तीय नुकसान हुआ है।”

जनहित में अहम सवाल कि सरकारी स्कूल और अस्पताल बनाने के नाम पर सरकारी संपत्ति ठेकेदारों की जेब में कैसे पहुंचाई जा रही है? अब देखना यह है कि एमपीबीडीसी व प्रबंधन, राज्य सरकार और जांच एजेंसियां इस ₹1.51 करोड़ के ऑडिट-प्रमाणित भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई करती हैं या फाइलें हमेशा की तरह दबा दी जाएंगी?