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एमपीआरडीसी का अंधा कानून या टोल घोटाला ?

यूज़र-फ्री/ फी सड़कों पर 10 अवैध टोल नाके, फर्जी कर्मचारी और करोड़ों का बंदरबांट..

भोपाल / उज्जैन / शाजापुर / रतलाम। युगक्रांति द्वारा किए ₹2700 से 27 करोड़ की शख्सियत के परत-दर परत खुलासों के बाद ये नया सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। जिसमें म प्र सड़क विकास निगम (MPRDC) के अंतर्गत संचालित टोल व्यवस्था अब कानून नहीं, बल्कि लूट का संगठित मॉडल बन चुकी है। प्रदेश की जिन सड़कों पर कानूनी रूप से टोल वसूली की कोई अधिसूचना ही मौजूद नहीं, उन्हीं मार्गों पर धड़ल्ले से कम से कम 10 टोल प्लाजा संचालित किए जा रहे हैं।

इस पूरे खेल में एक ओर सरकार की आंखों में धूल झोंकी जा रही है तो वहीं दूसरी ओर जनता से खुलेआम अवैध टैक्स वसूला जा रहा है। यद्यपि विभाग के संबंधित अधिकारी सड़कों पर टोल यूजर फी Usser Fee बता रहे हैं मगर अधिसूचना की जानकारी देने से बच रहे।

जिन स्टेट हाईवे एवं क्षेत्रीय सड़कों को नियमों के तहत यूज़र-फ्री होना चाहिए, वहां आज भी एमपीआरडीसी के नाम पर टोल वसूली जारी है। इनमें SH-25, SH-26, SH-17 सहित कई जिला एवं क्षेत्रीय मार्ग शामिल है जिस पर नाम वाइज विस्तार से चर्चा अगले खुलासा में। इन मार्गो पर न तो कोई वैध टोल अधिसूचना है, न ही PPP/BOT मॉडल की कानूनी स्वीकृति_इसके बावजूद साजिशाना ढंग से तथाकथित विभागीय माफियाओं एवं लुटेरों ने अपने गिरोह ( Force) के द्वारा इन स्थायी  प्लाजाओं/नाकों पर जबरन वसूली का खेल चालू किया। कई जगह तो गुंडई से दोपहिया वाहन एवं ट्रैक्टरों से वसूली भी की जा रही है।

फर्जी कर्मचारियों का घोटाला: कागजों में भीड़, मौके पर सन्नाटा

सूत्रों के अनुसार इस महा घोटाले की जड़ सिर्फ अवैध वसूली नहीं, बल्कि फर्जी मानव संसाधन घोटाला भी है। प्रदेश में एमपीआरडीसी द्वारा टोल नाकों का संचालन एक बड़ी नेटवर्किंग का बहुत बड़ा गोरख धंधा है।

जिसमें मौके पर जितने कर्मचारी कार्यरत हैं उससे कई गुना अधिक कर्मचारियों की तैनाती विभागीय कागजों में दर्शाई गई है। इन नामों पर फेक अटेंडेंस, फर्जी वेतन भुगतान और सरकारी धन की खुली लूट की जा रही है।
यानी टोल नाके पर कर्मचारीयों की वस्तविक तैनाती संख्या यदि 10 है तो रिकॉर्ड में 60 से 70 दर्शायी गई है।

💰 30% राजस्व, 70% बंदरबांट..

राज्य सरकार के स्थानीय स्तर पर संचालित इस तरह के टोल प्लाजाओं पर फास्टैग के बिना भी नगद शुल्क लेने के प्रावधान ही इस गोरख धंधे का बहुत बड़ा हथियार बना। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वास्तविक टोल वसूली का मात्र 30 प्रतिशत ही विभागीय खाते में जमा होता है, शेष 70 प्रतिशत राशि का_अधिकारियों, ठेकेदारों, मैनेजमेंट
एवं तथाकथित विभागीय लुटेरों और सरगनाओं के बीच सुनियोजित बंदरबांट किया जाता है।
यह अवैध कमाई लाखों नहीं, करोड़ों में पहुंच चुकी है, जिसका वास्तविक आंकड़ा जानबूझकर दबाया जा रहा है।

एमपीआरडीसी की चुप्पी या गलत बयानी_ संरक्षण अथवा मिलीभगत?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि_जब इन सड़कों को यूज़र-फ्री न होकर यूजर फी बताया जा रहा है तो वर्मा और सिंह साहब उनकी विधिवत अधिसूचना की जानकारी देने से क्यों कतरा रहे हैं?                                                                                     जब टोल की कोई वैधानिक अनुमति नहीं,                   और कर्मचारियों की संख्या फर्जी है,
तो फिर एमपीआरडीसी मुख्यालय अब तक मौन क्यों है?
👉 क्या यह चुप्पी और गलत बयानी अज्ञानता है या संरक्षण है?

महिला स्व-सहायता समूह (WSHG) का दावा भी अधूरा

प्रदेश की महिलाओं के सशक्तिकरण उद्देश्य से सरकार द्वारा कुछ टोल प्लाजा का संचालन महिला स्व-सहायता समूह (WSHG) को सौंपने का निर्णय लिया गया था लेकिन सरकार का यह लोक कल्याणकारी प्रस्ताव भी अब इस गोरखधंधे की प्रस्तावना बनता दिख रहा है? प्रदेश और संभाग स्तरीय टोल संचालक अधिकारियों का कहना है कि संबंधित टोल नाके WSHG द्वारा संचालित हैं लेकिन—समूह का नाम, पंजीकरण विवरण, अनुबंध या आदेश बगैरा बताने में ये सक्षम अधिकारी अपने को अक्षम जता रहे हैं।
इससे यह संदेह और गहराता है कि WSHG का उल्लेख केवल औपचारिक दावे तक सीमित तो नहीं?

⚖️ कानून क्या कहता है?

कानून स्पष्ट है—बिना अधिसूचना, बिना अनुबंध और बिना वैध टोल प्लाजा पर विभागीय माफिया तंत्र द्वारा कूटरचित वैधता की आड़ में की गई वसूली पूरी तरह अवैध है और इसे जबरन वसूली की श्रेणी में रखा जाएगा।
इसके बावजूद एमपीआरडीसी के अंतर्गत अंधा कानून चल रहा है, जहां नियम सिर्फ कागजों में हैं और ज़मीनी सच्चाई जनता की जेब पर डाका है।

एमपीआरडीसी टोलयह मामला मोहन सरकार की नेक नीयत से सीबीआई/ईओडब्ल्यू जांच, स्वतंत्र ऑडिट, और सभी टोल नाकों के तत्काल निलंबन की मांग करता है। इस पर यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट होगा कि
यह घोटाला कुछ अधिकारियों का नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था का है, जो कि जल्द जन आंदोलन बनकर न सिर्फ इन्हीं सड़कों पर हंगामा खड़ा करेगा बल्कि इसकी गूंज विधानसभा से लेकर लोकसभा तक गूंजेगी।

पड़ताल के बाद आगे कड़ी में होगा खुलासा..          *सड़कों पर संचालित टोल नाकों के नाम सहित इस अबैध कारोबारी तंत्र और इसका सरगना ?                                *अवैध उगाही की बंदरबांट ?