युग क्रांति की खबर का असर, तय सीमा में कार्रवाई के निर्देश
भोपाल 10 जनवरी 2026। युग क्रांति द्वारा उजागर किए गए एमपी भवन विकास निगम (MPBDC) में डिज़ाइन के नाम पर करोड़ों रुपये के इंजीनियरिंग स्कैम को लेकर अब शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। खबर को गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह ने मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए औपचारिक जांच एवं कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रमुख सचिव के निर्देश पर उप सचिव (PWD) एआर सिंह द्वारा 8 जनवरी 2026 को जारी पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि एमपीबीडीसी में निर्माणाधीन भवनों की ओवर डिज़ाइनिंग, आर्किटेक्चरल लापरवाही, फैक्टर ऑफ सेफ्टी में गड़बड़ी, DPR प्रक्रिया में अनियमितता और थर्ड पार्टी कंसल्टेंट्स को अत्यधिक भुगतान जैसे गंभीर आरोपों की बिंदुवार जांच अनिवार्य रूप से की जाए।
युग क्रांति की खबर से खुला पूरा खेल
युग क्रांति की खबर में यह सामने आया था कि—डिज़ाइन के
नाम पर अनावश्यक इंजीनियरिंग बढ़ाकर लागत कई गुना बढ़ाई गई, सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, DPR निर्माण में नियमों की अनदेखी हुई, निजी डिज़ाइन कंसल्टेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है।
इतना ही नहीं, खबर में सागर और सीधी जिलों के स्कूल भवनों की छत गिरने की घटनाओं का भी उल्लेख था, जो कथित डिज़ाइन और संरचनात्मक लापरवाही की ओर सीधा इशारा करती हैं।
डिज़ाइन विंग पर सीधा आरोप
पत्र में यह भी उल्लेख है कि एमपीबीडीसी के उप महाप्रबंधक (डिज़ाइन) श्री विक्रम सोनी पर निजी स्ट्रक्चर डिज़ाइन कंसल्टेंसी से मिलकर निगम के डिज़ाइन एवं अन्य अधिकारियों की सांठगांठ से कार्य स्वीकृत कराने की शिकायतें सामने आई हैं। इसमें अन्य अधिकारियों के नाम भी शिकायत में दर्ज बताए गए हैं।
समय सीमा में जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देश
प्रमुख सचिव के निर्देशानुसार—20 जनवरी 2025 को युग क्रांति प्रकाशित खबर पर दिनांक 23.12.2025 को प्राप्त शिकायत पत्र में उठाए गए सभी बिंदुओं की बिंदुवार जांच कर नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। यह स्पष्ट है कि अब मामला केवल विभागीय नहीं रहा, बल्कि शासन की सर्वोच्च प्रशासनिक निगरानी में आ चुका है।
युग क्रांति की इस खबर ने एक बार फिर साबित किया है कि सजग और निर्भीक पत्रकारिता से सत्ता और सिस्टम को जवाबदेह बनाया जा सकता है। करोड़ों रुपये के इस कथित डिज़ाइन घोटाले में अब यह देखना अहम होगा कि—
जांच कितनी निष्पक्ष होती है, दोषियों पर वास्तव में किस स्तर की कार्रवाई होती है, या नहीं अथवा फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
फिलहाल, इतना तय है कि युग क्रांति की खबर के बाद एमपीबीडीसी में खलबली मच चुकी है और शासन को नेक नियति से मजबूरन कदम उठाना पड़ा है।
