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मानव अधिकारों की हत्या का केंद्र है ग्वालियर की सेंट्रल जेल

अवैध वसूली के लिए दी जाती हैं कैदियों को तमाम तरीके की यातनाएं..

जेल प्रबंधन की निगरानी में पनप रहा है यह गोरख धंधा..

ग्वालियर 21 जून 2024। जांच- पड़ताल, निरीक्षण, औचक निरीक्षण वगैरा-वगैरा ये भ्रष्टता के इस दौर में मानो मात्र एक दिखावा बनके रह गए बल्कि कई विभागों में तो यही हथगंडे वरिष्ठ अधिकारियों की काली कमाई बढ़ाने के जरिये बन गए हैं।
इसी तरह का ग्वालियर सेंटर जेल का मामला सामने आया है। युग क्रांति द्वारा जारी किए गए वीडियो एवं अन्य शिकायतों के चलते पिछले महीने मध्य प्रदेश जेल के महानिदेशक गोविंद प्रताप सिंह ने सेंट्रल जेल ग्वालियर का औचक निरीक्षण किया

और उसी दौरान जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि “मध्य प्रदेश की जेल व्यवस्था में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं इस बदलाव के लिए तैयारी और समीक्षा चल रही है, अब कैदियों को सजा देने से ज्यादा उनके सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जेल विभाग का उद्देश्य जेल प्रबंधन की अवधारणा को बदलना है जिसमें सजा से ज्यादा पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, भारत सरकार द्वारा लागू किया जा रहे नए कानून से जेल प्रशासन के कानून में भी बदलाव आएगा जो की ब्रिटिश काल के कानूनों से हटकर होगा”।

वीडियो फैक्ट एवं शिकायतों के आधार पर जांच करने आए डीजी साहब ने जेल प्रबंधन के उन्हीं करिंदों की उंगली पड़कर प्रायोजित कैदियों से मुलाकात कर सच्चाई को टटोलने का औपचारिक प्रयास किया जिसके परिणाम स्वरूप ना तो जेल प्रबंधन की धारणा बदली और ना अवधारणा? यहां का मंजर जस का तस है।

जारी किए गए वीडियो की लिंक..

https://youtu.be/eCp6jvhZwo4?si=ECSo_g396lSzN8d

चंद दिनों पूर्व सेंट्रल जेल से रिहा हुए नरेश कंसाना ने अंदर के काले कारनामों का वीडियो जारी कर खुलासा किया। जिसमें उसने जेल प्रबंधन पर साफतौर पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जेल में आने वाले नए कैदियों से अवैध वसूली के लिए तब तक तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं जब तक कि उनसे वसूली की उगाई ना हो जाए। नरेश के चश्मदीदी कथन में किसी बिश्नोई एवं अन्य दो साथियों से 4 लाख रुपए की मांग एवं स्वयं के द्वारा 11 हजार रुपए देने का स्पष्ट जिक्र वीडियो में किया गया है। वीडियो एवं अन्य सूत्रों की माने तो जेल के भीतर कैदियों पर यातनाओं और तमाम शोषणों के एवज में अवैध वसूली के साथ-साथ और भी कई गोरख धंधे लगातार संचालित हैं। शासन से कैदियों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले कूलर को मन माफिक सुविधा शुल्क लेने के बाद उनकी बैरक में लगाए जाते हैं, शासकीय तौर पर प्रतिबंध कई वस्तुएं कई गुना दामों पर सहजता के साथ उपलब्ध है जैसे कि ₹10 की तंबाकू का पैकेट ₹450 में,₹20 का बंडल₹600 में और खुदरा एक बीड़ी ₹25 तथा₹40 एमआरपी वाली राजश्री 250 रुपए में।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में पूर्ण रूप से प्रतिबंध अंग्रेजों के शासन काल की कालकोतठरी आज भी यहां निर्मित ब्रिटिश कालीन प्राचीन जेल मैं कैदियों को किसी छोटे-मोटे बहाने से बंद किया जाता है और टैरर टैक्स भरने के उपरांत उसे यहां से निकाल लिया जाता है।
सूत्रों की माने तो यहीं पर स्थित महिला जेल में यातनाओं और शोषण का सिलसिला तो मानवीय हदों से परे है। अब देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश सरकार एवं शासन प्रशासन और मानवीय अधिकारों की रक्षा की दुहाई देने वाले आयोग एवं संस्थाएं जेल के भीतर लगातार घटित हो रहे अमानवीय अत्याचारों से कब मुक्ति दिलाते हैं और जेल के भीतर बंद कैदियों के पुनर्वास की ओर ध्यान केंद्रित करने की शुभ घड़ी कब आती है?