आत्मनिर्भरता से ही बनेगा भारत पुनः ‘सोने की चिड़िया’
आज जब पूरा विश्व वैश्वीकरण के दौर से गुजर रहा है, तब आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का प्रश्न बन चुकी है। आत्मनिर्भरता का मूल भाव है—अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करना, चाहे वह दैनिक उपयोग की वस्तुएँ हों, तकनीक हो, शिक्षा हो या उद्योग। वैश्वीकरण ने जहाँ दुनिया को…
